रिपोर्टर/अमित कुमार सकलडीहा धानापुर को तहसील बनाये जाने की भनक लगते ही अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने तहसील गेट पर पहुंचकर शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी किया। अधिवक्ताओं ने चेताया कि तहसील बनाने की कवायद को वापस नही लिया गया तो अधिवक्ता आत्मदाह करने के लिये मजबूर होंगे। आने वाले लोक सभा चुनाव में इसका बुरा परिणाम होगा। इस दौरान अधिवक्ताओं ने मांगे पूरा होने तक अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन व कार्य बहिष्कार की चेतावनी दिया है।
सकलडीहा तहसील का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 20 अक्तूबर 1994 को शिलान्यास किया था। इस दौरान तहसील क्षेत्र में कुल बढ़वल, महाईच, बरह, महुआरी, धूस,मवई के कुल 494 गांव सम्मलित हुआ था। वर्ष 2000 हजार में तहसील बनकर तैयार होगया। तब से अधिवक्ता अधिकारी बार ब्रेंच का सामान्जस बनाकर लोगों को न्याय देते आ रहे है। पीडीडीयूनगर तहसील बनने पर सकलडीहा तहसील के दो परगना धूस और मवई के 54 गांव सम्मलित कर लिया गया। शेष 441 गांव सकलडीहा तहसील में संचालित है। करीब 25 साल होगया आजतक मुंसफी कोर्ट की स्थापना तक नही हो पाया। जबकि लम्बे समय से अधिवक्ता मुंसफी न्यायालय की मांग करते आ रहे है।
उल्टे तहसील की सैकड़ों गांव को काटकर नये तहसील बनाने की कवायद कुछ नेताओं द्वारा किया जा रहा है। जबकि पूर्व में बनी पीडीडीयूनगर, नौगढ़ तहसीलों में आजतक सुविधाओं का अभाव है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि नये तहसील बनाने की कवायद को वापस नही लिया गया तो अधिवक्ता अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन करने के लिये मजबूर होंगे। लोक सभा चुनाव में इसके बुरे परिणाम होगा। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने शासन प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी किया। इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष मनोज पांडेय, उपेन्द्र नारायण सिंह, पंकज सिंह, नितिन तिवारी, जगदीश सिंह,अतुल तिवारी, सुरेन्द्र कांत मिश्रा, अरूण कुमार, सच्चिदानंद, अखिलेश तिवारी, प्रभु पाठक, अंकित तिवारी, आलोक मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें