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शुक्रवार, 14 अप्रैल 2023

बेसहारा कुत्तों की सेवा के लिए हिमांशी ने छोड़ दी मेडिकल की पढ़ाई बन गई डॉग्स गर्ल




रिपोर्टर/अमित कुमार

सकलडीहा वैसे तो हर कोई जीवन में कुछ करना और बनना चाहता है, किंतु बात जब कैरियर की हो तो अपने घर वालों की नहीं अपने दिल की सुननी चाहिए कि वह कौन सा काम बेहतर तरीके से कर सकते हैं। इसमें जो दिल की सुनता है, वह एक दिन उस क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ता है। यह बात पूर्व मेडिकल छात्रा हिमांशी पाठक पर बखूबी लागू होती है।

वाराणसी के कैंट निवासिनी हिमांशी पाठक इंटर करने के बाद मेडिकल की तैयारी में लग गई। किंतु उसमें मन नहीं रमा। रास्ते में आते जाते समय आवारा कुत्तों की बेचारगी, बेबसी और भूख से तड़पते उनके बच्चों लाचारी हिमांशी से देखी नहीं जाती थी। तब उसने तय किया किया वह इन बेजुबान जानवरों की सेवा करेगी। शुरुआत में हिमांशी का यह फैसला किसी को अच्छा नहीं लगा, लेकिन हिमांशी अपने निर्णय पर अडिग रही। फिर धीरे धीरे परिवार के लोग भी मान गए और इस नेक कार्य में सहयोग करने लगे।

बाद में हिमांशी ने जीव रक्षक सामाजिक सेवा समिति के नाम से संस्था बनाई और आज उसी के बैनर तले काम कर रही हैं। कैंट रेलवे स्टेशन, कैंसर अस्पताल, लहरतारा से लेकर चांदपुर तक  प्रतिदिन अपनी टीम के सदस्यों हिमांशु पाठक, नमन पांडेय, शिवांश चौबे, आयुष कुशवाहा, रिशु सिंह राठौर, राहुल यादव और उत्तम राय के साथ लाचार कुत्तों के लिए दूध, चावल, खिचड़ी, दवाई, मलहम आदि लेकर हिमांशी निकल जाती हैं और उनको भोजन व दवाएं देती हैं। 

अपने घर पर ही पंद्रह जरूरतमंद कुत्तों का संग्रह कर उनकी सेवा कर रही हैं। हिमांशी बीएससी की छात्रा भी हैं। उनका मानना है कि इन अनबोलता जानवरों की सेवा ईश्वर की सेवा के समान है।

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