रिपोर्टर/अमित कुमार सकलडीहा धानापुर को तहसील बनाये जाने को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश थमने का नाम नही ले रहा है। गुरूवार को दूसरे दिन तहसील के अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम से एसडीएम को पत्रक देते हुए तहसील मुख्यालय पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ राजनीनितक व्यक्तियों के निजी स्वार्थ के खिलाफ जमकर भड़ास निकाला। समस्या का ठोस आश्वासन नही मिलने पर सोमवार से अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन और आत्मदाह की चेतावनी दिया।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि 27 साल से सकलडीहा तहसील का संचालन हो रहा है। आज भी तहसील में लेखपाल से लेकर राजस्व निरीक्षक सहित अधिकारी और कर्मचारियों के दर्जनों पद रिक्त है। प्राइवेट कर्मचारियों के भरोशे तहसील के अधिकांश कार्यालय संचालित होता है। जबकि लम्बे समय से मुंसफी कोर्ट की मांग किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिवक्ताओं को कोरा आश्वासन देते आ रहे है। पूर्व में सकलडीहा तहसील के 54 गांव दो परगना को पीडीडीयू नगर तहसील में शामिल करके तहसील के क्षेत्रफल कम कर दिया गया है। पुन: कुछ राजनीनितक व्यक्तियों द्वारा निजी स्वार्थ के लिये क्षेत्र की जनता को गुमराह कर रहे है।
अंग्रेजों की तरह फूट फूट डालों राज करों की निति अपना रहे है। आक्रोशित अधिवक्ताओं सकलडीहा और सदर तहसील का दायर कम करने का नेताओं पर आरोप लगाते हुए विरोध जताया है। अंत में मुख्यमंत्री के नाम से एसडीएम को पत्रक देते हुए तहसील बनाये जाने की कवायद पर रोक लगाने की मांग किया है। इस मौके पर बार अध्यक्ष अशोक मिश्रा,पूर्व अध्यक्ष नितिन तिवारी, पंकज सिंह,अजय कुमार सिंह, शैलेन्द्र पांडेय, जगदीश सिंह, संतोष सिंह, रामराज यादव,श्रीकांत सिंह, दीनानाथ, अशोक यादव, रामअवध यादव, मनोज पांडेय, उपेन्द्र नारायण सिंह,अतुल तिवारी, सुरेन्द्र कांत मिश्रा, अरूण कुमार, सच्चिदानंद, अखिलेश तिवारी, प्रभु पाठक, अंकित तिवारी, आलोक मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।

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